न्यायाधीश पी. पी. मुले
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की कल्याण कोर्ट ने एक लव जिहादी को हिन्दू अल्पवयीन लड़की को जबरन मुसलमान बनाने और बलात्कार करने के आरोप में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने लव जिहादी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
कल्याण कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-4 पी. पी. मुले ने सोमवार, 7 सितम्बर 2026 को यह सज़ा आरोपी अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी (25) को सुनाई। सरकारी वकील श्रीमती वी. डी. सोनटक्के और सचिन कुलकर्णी ने केस की पैरवी की। जांच अधिकारी पंढरीनाथ मारुति भालेराव थे।
अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी मुंबई के मोगरापाड़ा, रिलैक्स कंपनी के पास, अँधेरी (पश्चिम) का रहेवाला है। यह पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का बाप था। अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी ने ठाणे जिले के डोम्बिवली में रहनेवाली एक हिन्दू लड़की को अपने प्रेम जाल में फंसाया। उस लड़की ने अज्ञात कारणवश आत्महत्या कर ली तो अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी ने उस लड़की की छोटी बहन को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। इस लड़की की उम्र मात्र 14 साल थी। 31 दिसम्बर 2011 को अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी उस अल्पवयीन लड़की को भगा ले गया। वह उसे लेकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर गया। वहां मौलवी का प्रबंध कर उसने मस्जिद में लड़की का धर्म परिवर्तन कर हिन्दू से मुसलमान बनवा दिया। उर्दू में लिखे कुछ कागजात पर साइन भी ले ली। इसके बाद एक लॉज में ले जाकर लड़की के साथ बलात्कार कर दिया। बलात्कार की वजह से लड़की बेहोश हो गयी और चार दिन तक बेहोश रही।
इधर लड़की के पिता ने डोम्बिवली के मानपाड़ा पुलिस स्टेशन में अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी के खिलाफ भा.दं.सं. की धारा 363, 366 और 376 के तहत FIR कर दी। शुरू में पुलिस ने मिसिंग कंप्लेंट दर्ज की थी। लेकिन लड़की के पिता ने तब के गृह मंत्री आर. आर. पाटिल को अप्रोच किया और आर. आर. पाटिल के हस्तक्षेप से पुलिस ने FIR दर्ज की। गृह मंत्री के हस्तक्षेप से एक्टिव हुई मानपाड़ा पुलिस ने 5 फरवरी 2012 को अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी को उसके अँधेरी के घर से गिरफ्तार कर लिया। 12 सितम्बर 2012 को अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी को जमानत पर बाहर आ गया।
अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी लड़की को फ्लाइट से मुंबई से लखनऊ लेकर गया था। लेकिन टिकट फर्जी नाम से निकाला था। लखनऊ के लॉज में भी फर्जी नाम से कमरा बुक किया था। शुरुआत में भनक लगने पर लड़की के पिता और पुलिस ने अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी को समझाया था कि लड़की हिन्दू है और माइनर है इसलिए उसका पीछा छोड़ दे। पर वह नहीं माना।
28 मार्च 2012 को पुलिस ने मामले में चार्जशीट फाइल की। लव जिहादी अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी की तरफ से वकील एम. एच. सावंत ने पैरवी की। और बहुत बकवास पैरवी की। उनकी बहस और तर्क से न्यायाधीश सहमत नहीं हुए। न्यायाधीश पी. पी. मुले ने सुप्रीम कोर्ट के 2017 के Independent Thought मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना IPC की धारा 376 के तहत दुष्कर्म है। विवाह की रस्में पूरी हो जाने या पीड़िता को पत्नी बताए जाने की स्थिति में भी आरोपी को धारा 375 के अपवाद-2 का संरक्षण नहीं मिल सकता।
अंततः सोमवार, 7 सितम्बर 2026 को विद्वान न्यायाधीश माननीय पी. पी. मुले ने अज़हर उर्फ़ बदु मुस्ताक कुरैशी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुना दी।
